Gazal E Dosti

दोस्ती एक गज़ल --मेरी कलम सॆ
मैं दोस्तों के मुलाकातों के लम्हे याद रखता हूँ ,
उनकी  बातें भूल भी जाऊँ तो लहजे याद रखता हूँ ,
सरे आम महफिल में पड़ती हैं जब उनकी निगाहें मुझपर ,
मै निगाहों के हवाले चेहरे याद रखता हूँ !!

ज़रा सॆ हट के चलता हूँ ; ज़माने की रवायत सॆ 
कि उनपर बोझ डालूं तो कंधे याद रखता हूँ ,
दोस्ती किया हैं तो निभाउंगा जी जान सॆ ; 
क्योंकि मै दोस्ती के हवाले रिश्ते याद रखता हूँ !!

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