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Showing posts from August, 2017

Intzaar Kar

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शाख के पत्ते मानिंद टूट गये, उनके हरा होने का इंतजार कर॥ जान थी जिस तन की उसके दिल की उनके धागों को जुड़ने का इंतजार कर ॥ जिंदा हो जमी पर पड़ी पड़ी तुम कभी कदमो के आहट कूचने का इंतजार कर !! मुसीबतों में शायद फना हो गये उसूल उनके, अभी मिजाज-दिल बदलने का इंतजार कर ॥ ताले लटक रहे साँकल के दरवाजे की चौखट पर, यादों को दस्तक देने का इंतजार कर ॥ जाने पहचाने क़दम पड़े हैं आहट के अब ग़म -ए-इश्क दौर से राहत का इंतजार कर ॥ #उत्तम त्रिपाठी

Achchha lagta hai

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मुझे अच्छा सा लगता है ... तुम्ही को देखते रहना तुम्ही को चाहते रहना तुम्ही को सोचते रहना तुम्ही को सुनते रहना.... बहुत गहरे खयालों में, जवाबों में,सवालो में ,मोहब्बत के हवालों में,तेरा नाम आ जाना  मुझे अच्छा लगता है !! तुम्हारे संग -संग चलना, वफा की आग में जलना तुम्हे नाराज़ कर देना .... कभी खुद रूठ जाना, तुम्हारी बेरुखी पे  भी तुम्हारी आरजू करना , खुद अपने दिल की धड़कन सॆ तुम्हारी गुफ्तगू करना..... मुझे अच्छा लगता है !! #उत्तम त्रिपाठी

Kal ki Mulakat

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कल मेरी उनसे मुलाकात हुई , उसमे कुछ ऐसी बात हुई उनके होठो से टपकी ज़ो बूँदें वो मेरे लबो के साथ हुई !! अब हर पल छाई मदहोशी है, कुछ ऐसी मेरी खामोशी है क्या ज़िक्र करूँ उन लफजो का ज़ो लाई मुझपे मायूसी है !! इन हसरतो को दिल में दबाऊँ कइसे यह ख्वाब ज़माने को बताऊँ कइसे जाने कब तक भटकेंगे ये नैना इंतजार में तुम्हारी यादो से पीछा छुडाऊँ कईसे !! तरस्ते हैं , तडपते हैं अब फरियाद यही करते हैं , दिन रात तुमसे मिलने को हम खुदा को याद करते हैं इक मंजर सा है सीने में अब तलक जाने कइसा जैसे बातो ही बातो में तुमको याद किया करते हैं !! # उत्तम #आदर्श ❤

Rakshabandhan Kavita

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घर की आँगन में खड़ी वो देवी याद आयी है, अंखियॊं में स्वपन लिये आज बहना याद आयी है, इक हिलोर सी उठी है सीने में यादों की , आज फ़िर से देखो इक राखी याद आयी है ॥ श्वेता के निश्छल प्रेम  से बँधी वो कलाई याद आयी है, मधु के हाथों की वो मिठाई याद आयी है, निवेदिता के नखरे और निक्की की दुआयें याद आयी है, बीते लम्हों में हमने ये दीपक जलाई है, बधाई हो आपको आज इक राखी याद आयी है ॥॥ #उत्तम त्रिपाठी

स्वर्णिम युग

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आज स्वर्णिम युग की शुरुवात हुई है मेरे मन ने मुझसे ये बात कही है बिजली चमकी बादल गरजा कि देखो,सावन की अब बरसात हुई है॥            "नज़ारे देखो कैसे हैं" अब तितलियाँ भी हृदय से पुलकित हुई हैं बागोँ में पुष्पों पर ऐसे आनंदित हुई हैं हिलोरें उठी हैं समंदर तरंग सी उत्फुल्ल हर्ष से जैसे प्लावित कर गई हैं ॥ #उत्तम त्रिपाठी

बेरहम ज़माना

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जामाना अब बेरहम सा लगता है, मुस्कुराना उनका का अब बहुत खलता है, शख्त मुस्किल में हूँ ये खुदा की क्या करू मैं अब पीछे पीठ के भोकना छूरा अब यहां चलन सा लगता है !! चुनुं कंकर..या नगीना बांध लूँ , छोडू साहिल या सफीना मांग लूं, ज़माने! तू मुझसे जलता बहुत है तू कहे तो छोड जीना मैं मृत्यु मांग लूँ !! #उत्तम त्रिपाठी