स्वर्णिम युग

आज स्वर्णिम युग की शुरुवात हुई है
मेरे मन ने मुझसे ये बात कही है
बिजली चमकी बादल गरजा
कि देखो,सावन की अब बरसात हुई है॥
           "नज़ारे देखो कैसे हैं"

अब तितलियाँ भी हृदय से पुलकित हुई हैं
बागोँ में पुष्पों पर ऐसे आनंदित हुई हैं
हिलोरें उठी हैं समंदर तरंग सी
उत्फुल्ल हर्ष से जैसे प्लावित कर गई हैं ॥
#उत्तम त्रिपाठी

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