Rakshabandhan Kavita
घर की आँगन में खड़ी वो देवी याद आयी है,
अंखियॊं में स्वपन लिये आज बहना याद आयी है,
इक हिलोर सी उठी है सीने में यादों की ,
आज फ़िर से देखो इक राखी याद आयी है ॥
श्वेता के निश्छल प्रेम से बँधी वो कलाई याद आयी है,
मधु के हाथों की वो मिठाई याद आयी है,
निवेदिता के नखरे और निक्की की दुआयें याद आयी है,
बीते लम्हों में हमने ये दीपक जलाई है,
बधाई हो आपको आज इक राखी याद आयी है ॥॥
#उत्तम त्रिपाठी
अंखियॊं में स्वपन लिये आज बहना याद आयी है,
इक हिलोर सी उठी है सीने में यादों की ,
आज फ़िर से देखो इक राखी याद आयी है ॥
श्वेता के निश्छल प्रेम से बँधी वो कलाई याद आयी है,
मधु के हाथों की वो मिठाई याद आयी है,
निवेदिता के नखरे और निक्की की दुआयें याद आयी है,
बीते लम्हों में हमने ये दीपक जलाई है,
बधाई हो आपको आज इक राखी याद आयी है ॥॥
#उत्तम त्रिपाठी

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