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Showing posts from September, 2016

Nargisi Aankhe

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तेरी बातों में हम खोते चले गये, न चाहते हुए भी तेरे होते चले गये, जाने क्या बात थी तेरी नरगिसी आँखों में "सनम" , तेरी यादों के हुस्न में हम सोते चले गये !! अब तो हालत मुफलिस की कुछ इस कदर हो गयी, सुर्ख होठों पर जैसे घटायें छा गयी, तमाशा तकदीर ने किया ज़िन्दगी में कुछ इस तरह "उत्तम"; कि पत्थर दिल से मोहब्बत करने की सजा मिल गयी !! #उत्तम त्रिपाठी

Dost Ko Salam

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------:::::::::::::::दोस्त::::::::::-----मेरे :::::--- ऎ दोस्त तुमको मैं  दिल से  सलाम करता हूँ, रहम लाये खुदा मौला तुमपर ये पैगाम लिखता हूँ, तुम्हारी आँखों की दो बूँदों से हारे सातों सागर , यही चाहत से तुमपर जां निसार करता हूँ ! दोस्त दिल की ये दुआये हैं ज़रा गौर फ़रमाना, टूटे न कभी दिल मेरा बस खैर अर्जाना , होती हैं हर शक्स से बेदर्द दुनियाँ में बातें, ऎ दोस्त किसी भी गलती पर दोस्ती का अदब कर जाना !! #उत्तम त्रिपाठी

हमदम

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ये गजलें मेरी हमदम मेरी माँ बन गयी , घुप अँधेरों में जलती हुई शमा बन गयी , लोग हँसते हैं तो हँसने दो मेरे ऊपर -- अब तो मेरी तन्हाईयाँ ही मेरी रहनुमा बन गयी !! #उत्तम त्रिपाठी

Step Toward To Rich

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THERE are two kinds of knowledge. One is general, the other is specialized. General knowledge, no matter how great in quantity or variety it may be, is of but little use in the accumulation of money. The faculties of the great universities possess, in the aggregate, practically every form of general knowledge known to civilization. Most of the professors have but little or no money. They specialize on teaching knowledge, but they do not specialize on the organization, or the use of knowledge. KNOWLEDGE will not attract money, unless it is organized, and intelligently directed, through practical PLANS OF ACTION, to the DEFINITE END of accumulation of money. Lack of under￾standing of this fact has been the source of confusion to millions of people who falsely believe that “knowledge is power.” It is nothing of the sort! Knowledge is only potential power. It becomes power only when, and if, it is organized into definite plans of action, and directed to a definite end. This...

Ab to ban jao Gazal

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नजर मे खुद की न गिरो कि अब सुधर जाओ। बहुत बिगाड़ा है तुमने अब तो बन जाओ। धोखा बार बार खुद को ही आखिर देते क्यूँ हो? किसी उद्देश्य खातिर जिन्दगी मे रम जाओ। राह, राह है, जन्नत ओ जहन्नुम की ओर ले जाती। बस इक नेक राह अब तुम भी जरा चुन जाओ। खत्म करो उहापोह, आपाधापियों के सिलसिले। बनो अडिग और वक्त का उपयोग जरा कर जाओ। रात की बात है दिन भी मिलेगा यहाँ तुमको 'Uttam'। उजाला तुमसे हो बस सूरज की तरह चमक जाओ। #उत्तम त्रिपाठी

Amanat to milegi hi Gazal

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ग़ज़ल।अमानत  तो मिलेगी ही । रहोगे नेक दिल बेशक़ इमानत तो मिलेगी ही । करारा जख़्म होगा पर अमानत तो मिलेगी ही । ग़मे ग़र्दिश हकीक़त मे ख़ता तारीफ़ की ख़्वाहिश । वफ़ा की रहनुमाई में ज़लालत तो मिलेगी ही । बड़ी नायाब होती है अदाओं की गिरफ़्तारी । निग़ाहें बर्क़ रखो तुम शरारत तो मिलेगी ही । बहुत हो दूर मंजिल पर चले बेबाक़ तुम जाओ । लगेंगे ग़म भरे झोंके हरारत तो मिलेगी ही । शिकारी हो रहा देखो यहा हर शख़्स रंजिस में । साज़िश हो रही उसकी वकालत तो मिलेगी ही । अग़र है आदमी सच्चा अदालत क्या गवाही क्या । भले हो क़ैद दो इक दिन ज़मानत तो मिलेगी ही । अभी पितृ पक्ष  है "रकमिश" निगाहें रख रहीं भूखी  । रहम लाएगा खुद मौला इनायत तो मिलेगी ही । #उत्तम त्रिपाठी

Bewafa Sanam

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जिक्र खुशियों का किया, और ग़म मे डुबा गया। वो बेवफा सनम यारों, मुझको ही मुझसे छुपा गया। आँखों मे मेरी अपने जादुयी चेहरे का जादू करके, वो मेरा मालिक बन, मेरे वजूद को जाने कहाँ लुटा गया? अपनी यादों के सब्जबाग को मेरे दिल मे सजा कर, मुझे अपनी जिन्दगी से ही वो हरजायी भुला गया। सितम ये भी न कम था कि आज फिर से वो मिला, मुस्कुराते हुए मुझे, अपनी खुशियों से जिन्दा जला गया। #उत्तम त्रिपाठी

Naam E Mohabbat

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जो रूह से रुबाइयों में उतर जाये उसका नाम मोहब्बत है , जो मन का बोझ मिटा दे उसका नाम मोहब्बत है , दो मिलन की राहों को  मुकम्मल कर देने का नाम मोहब्बत है, "मुफलिसी"उन निगाहों के खातिर खुद को मुफलिस बना लेने का नाम मोहब्बत है , तड़प तड़प कर जान निकल जाये फ़िर भी ,जो दिल की धड़कन वापस मोडे उसका नाम मोहब्बत है !! #उत्तम त्रिपाठी

Pyar ki Pahli Nazar

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एक गज़ल मेरी कलम से   !!  प्रेम की पहली नज़र के पहले दृश्य का !! तेरी मुलाकात का वो दिन-ए-इत्तफाक था ; मानो चेहरे की नूर पर लगाये कोई फिराक था; लबों की मुस्कुराहट का वो जादू मलूक था ; जान-ए-तमन्ना का रहा ये इश्क अजीब था ;  पहली नज़र में ही गिरा ये गरीब था !! बेबसी की हालत में वो भी थी और मैं भी था : खुश वो भी थी , खुश मैं भी था ; मंजिलें इश्क का न ओर था न छोर था; पागल था मैं और भाव विभोर था ; मेरे साथ कोई नहीँ बस आदर्श-ए-नसीब था ; पहली नज़र में .............गिरा ये गरीब था !! याद है मुझे इजहार-ए-दिन था ; कुछ न बोल सका बस दिखा मजबूर था ; समय था कम और जाना दूर था ; दास्तान-ए-इश्क को शायद लगा ये मंजूर था ; बेचारा था "उत्तम "पर लगा रकीब था !! पहली नज़र ...........: था  !!     !! #उत्तम त्रिपाठी

Khoobsoorat Inam

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बहुत तेज आँधी आयी थी गुबार अल्फाजों का दिखा था। जज्बातों की हवाओं का झकझोरने वाला सिलसिला था। अश्क सूखे हुए थे, लालिमा आँखों मे चमक रही थी फिर भी। बनके खण्डहर मोहब्बत का, जिस्म टूटा हुआ किला था। थपेड़े उनकी रेतीली यादों के दिल को लहूलुहान किए जाते थे। बहुत ही खूबसूरत ईनाम, मुझे सच्ची मोहब्बत का मिला था। थी प्यास इस कदर, जो कभी न बुझने को आतुर थी । बार बार हर एक बार, बस मैक़दे को दीवाना चला था। #उत्तम त्रिपाठी

Khusnuma Do Pal

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"दो पल मिले हैं तुमको, यूँ ही न बीत जाएँ कुछ यूँ करो कि धड़कन, आँसू के गीत गाएँ जो मन को हार देगा, उसकी ही जीत होगी अक्षर बनेंगे गीता, हर लय में प्रीत होगी बहुमूल्य है व्यथा का, उपहार माँग लेना यदि स्नेह जाग जाए, अधिकार माँग लेना...

Ek Nanhi Pari Gazal

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मेरी एक गज़ल -- -मैं परेशां हूँ -- (प्यारी बिटिया को समर्पित) क्या कहूँ बेटी ! मैं बहुत परेशां हूँ , मिल ना सका तुझे इन्साफ ,मैं पशेमां हूँ . तेरे गम से मेरा गम ऐ लाडो ! जुदा नहीं, तेरे अश्को -आहों में लहू की मानिद रवां हूँ . तेरी दर्द भरी चीखें अब भी मैं सुनता हूँ , जाने ज़माना क्यों हो रहा बेहरा ,हैराँ हूँ . इन सियासत दारों को तो अपनी पड़ी है , इन्हें तो शर्म नहीं , मगर मैं शर्मिन्दा हूँ . क्या कहूँ बेटी ,मैं बहुत परेशां हूँ ; मिल न सका तुझे इंसाफ,मैं पशेमा हूँ !! #उत्तम त्रिपाठी #

Gazal E Dosti

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दोस्ती एक गज़ल --मेरी कलम सॆ मैं दोस्तों के मुलाकातों के लम्हे याद रखता हूँ , उनकी  बातें भूल भी जाऊँ तो लहजे याद रखता हूँ , सरे आम महफिल में पड़ती हैं जब उनकी निगाहें मुझपर , मै निगाहों के हवाले चेहरे याद रखता हूँ !! ज़रा सॆ हट के चलता हूँ ; ज़माने की रवायत सॆ  कि उनपर बोझ डालूं तो कंधे याद रखता हूँ , दोस्ती किया हैं तो निभाउंगा जी जान सॆ ;  क्योंकि मै दोस्ती के हवाले रिश्ते याद रखता हूँ !!