हमदम

ये गजलें मेरी हमदम मेरी माँ बन गयी ,
घुप अँधेरों में जलती हुई शमा बन गयी ,
लोग हँसते हैं तो हँसने दो मेरे ऊपर --
अब तो मेरी तन्हाईयाँ ही मेरी रहनुमा बन गयी !!
#उत्तम त्रिपाठी

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