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Showing posts from January, 2018

मैं उत्तम हूं

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मुझे किसी और कि तरह बनने कि जरूरत नही, क्यूँकि, # मैं_उत्तम_हूं मुझे सुनने वाले आख़िर, मुझे परख लेते हैं जब मैं कुछ नही कहता फिर भी वो सुन लेते हैं.... सब आदर करते हैं मुझे दर्प की जरूरत नहीं, मुझे किसी और की तरह बनने की जरूरत नहीं.. क्योंकि, #मैं_उत्तम_हूं जब लोग नाराज़ हो जाते हैं... तो मैं उन्हें मना लेता हूं, उनकी गुस्ताखी छिपाकर, मैं खुद को हरा लेता हूं... सब प्रेम करते हैं मुझे घृणा की जरूरत नहीं, मुझे किसी और की तरह बनने की जरूरत नहीं, क्योंकि..... #मैं_उत्तम_हूं ।। # उत्तम_त्रिपाठी

हां मैं वहीं था

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प्रिए, तुम्हारे नेह भरे लफ्जो से, हृदय पिघल रहा है... जैसे धरा क्षितिज पर जाकर सिमट रहा है ।। उपवन में नाचते मोरो ने... दिल में इक अजीब सी ख्वाहिश जागृत किए हैं ।। जिस चांदनी रात का तुम जिक्र कर रही हां मै वही था, बिल्कुल तुम्हारे समीप , तुम्हे चाह रहा था, तुम्हे सुन रहा था, पर तुम्हे छूने की कोई उत्कंठा न थी, मेरी प्रीत बिल्कुल चकोर सी थी और पता है, ये सब क्यों? क्योंकि मुझे अच्छा सा लगता है, तुम्ही को चाहते रहना, तुम्ही को सुनते रहना, बहुत गहरे ख्यालों में,,,,, मोहब्बत के हवालों में तुम्हारा नाम आ जाना अच्छा लगता है ।। और मै इस अहसास को कभी, भूलना नहीं चाहता, हां मैं वहीं था हां मैं वहीं था प्रिय ।। # उत्तम त्रिपाठी

Basant Shahnaai

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अपने कुरबत दिल...... बसंत ने एक मधुमई शहनाई से जो दूर क्षितिज पर लाखों मीलों दूर है, आज एक प्रिय विछोह का संवाद सुना रहा है.. वो ताना कसते हुए कहता है कि, जिस दिन से प्रेम तुम्हारा मिला है, हर शय मुझपे निसार हो गया है.. बोलता है, गुलाब कदमों में बिछ रहे, चराग राहों में जल रहे हैं ।। # उत्तम_त्रिपाठी

Likhna Chahta hun

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प्रिय तुम्हारी छवि देखकर, मै खुद को भूल गया हूं, तुम पर कुछ लिखना चाहता हूं पर सारे शब्द भूल गया हूं । मेरे दिल मे तुम्हारा चेहरा कुछ एेसे है जैसे श्रध्दा से किसी मन्दिर मे.. दीप जला दिया गया हो ।। मेरे जीवन में तुम्हारी दस्तक कुछ ऐसे है जैसे सूखे से मेरुस्थल मे.. सावन घिर आया हो ।। पता है.. एक अरसे से है हमारे दरमियां ये दूरी, फिर भी हमने मिलन की आस अब तक न छोड़ी ।। अब......... आंख खुलते ही सपना टूट जाता है, प्रिए, तुम पर कुछ लिखना चाहता हूं, तो दिल टूट जाता है !! # उत्तम_त्रिपाठी

Mera Ishq

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मेरी ग़ज़लों में शामिल हुए, वो हज़ार बार आए!! भूल न पाए उन्हें, जिनके साथ... मेरा नाम इकबार आए !! मैंने अपने गुनाहों का चिट्ठा बनाकर रखा है, कुबूल लूंगा सारे, खुदा जो ख़्वाब में इक बार आए ।। ज़िन्दगी में दुःख तो मैंने बहुत पाए, दर्द बहुत होता है, जब चाहकर भी नींद आंखों में न आए ।। शुक्र है खुदा तू सब पे बरसता है, पर जिसका तू नहीं, वो बेचारा कहां जाए ।। तुम कहती हो तुम्हे नीद नही आती, तो वजह कुछ और होगी, अब हर ऐब के लिए कसूर ठहराऊं, तो मेरा इश्क़ कहां जाए ।। # उत्तम_त्रिपाठी