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Showing posts from September, 2019

Happy Hindi divas

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I love hindi like ❤, no matter how much I express it, but It come to my tongue.. #Uttam_Tripathi

मौसम, कॉफी और तुम

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पास तुम भी आओ, तो... मौसम के भी कुछ मायने हो । बिन तुम्हारे .. अब, ये कॉफी भी अच्छी नहीं लगती ।।

सच में

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तुम्हारा मुस्कुराना, कि जैसे कलियों पर निखार आना ... तुम्हारा रूठना, कि जैसे.. किसी ने कायनात पलट दी हो "वैसे" ।।

विरह पंक्ति

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लोग आते हैं, चले जाते हैं.... मैं, कि जैसे बिखरा ख्वाब किसी की आंखो का । टूट चुका हूं, टूटा पड़ा हूं, इधर ही कहीं..... किसी कोने में ।। #उत्तम_त्रिपाठी

।। दिल ।।

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आंखें मिलती हैं... तो पलकें झुक जाती हैं । दिल सम्हलता है, तो सांसें थम जाती हैं । मिलते हैं तो छू नहीं सकते, अपना तो.. इश्क भी शाकाहारी है यार ।।

।। ज़िन्दगी और हम ।।

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अक्सर हम जब किसी को भी सोच रहे होते हैं तो सिर्फ उसी को सोचते है... नींद में भी उसी को याद करते हैं... उसके दुखों पर रोने का मन करता है ।। संसार का मैं एक ऐसा person हूं जो त्रासदी के हर दुखों को भोग चुका हूं ... ये कौन लाता है दुखों को.. अपने आप आ जाते हैं मालूम नहीं कहां कहां से... आज office में बैठकर मैं बचपन याद कर रहा था ... फिर survey के लिए बाहर metro में बैठा तो connought place आया वैसे ही मुझे door will open on left वाली आवाज़ से दुःख होने लगा ... वैसे ही असमान्य दुःख है फिर लिखते हुए ... मुझे एक पेंटिंग याद आती है जिसमें छोटे छोटे नीले पहाड़, एक आधी सुनहरी ज़मीन पर पेड़ और ज़रा सी घास। क़ायदे से ऐसी तस्वीर में हमेशा एक नदी होती थी और चाँद...एक नाव होती थी पाल वाली और उसमें अकेली बैठी एक लड़की, जाने क्या सोचती हुयी।। मैं बड़ी सी झील की कल्पना करता था और उसमें किसी नाव में देर रात तक अकेले जा रहा होता था। उन दिनों ऐसे अकेले अकेले चले जाने में या रात को इस तरह झील पर नाव में बैठे होने में डर नहीं लगता था। मैं छोटा था। डर मेरे लिए कोई किताब की चीज़ थी। टैंजिबल नहीं। काल्पनि...

।। प्रेम, उलाहना और ज़िन्दगी ।।

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नसों में कहानियां उमगती हैं ।। मैं जहाँ होता हूँ वहाँ से चल पड़ता हूँ, अक्सर एक व्यथा यात्रा बन जाती है । - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना [साभार कविता कोश] बहुत साल पहले कभी पहली बार पढ़ी होगी ये कविता। लेकिन कितना पहले और ज़िंदगी के किस पड़ाव पर, याद नहीं। इसकी आख़िरी पंक्ति मेरी कुछ सबसे पसंदीदा पंक्तियों में से एक है। ‘अक्सर एक व्यथा, यात्रा बन जाती है’। इसके सबके अपने अपने इंटर्प्रेटेशन होंगे, क्लास में किए गए भावानुवाद या कि संदर्भ सहित व्याख्या से इतर। रूमी की एक पंक्ति, What you seek is seeking you... ज़िंदगी में एकदम सही साबित होती है। मुझ तक दुनिया भर की बेहद उदास और ख़ूबसूरत चीज़ें पहुँचती हैं। ख़ुद ही। कई साल पहले दिल्ली आया था पहली बार, उसके बाद गूगल का अल्गोरिथ्म जानता है कि मुझे दुःख के बारे में जानना होता है... पता नहीं क्यूँ। दुःख,प्रेम, विरह का लोगों के जीवन में इतना करीबी से ताना बाना क्यूं है ?? एक दूसरी किमवदंति ये है कि दुनिया के आख़िर छोर पर भरम का समंदर है। वहाँ का रास्ता इतना मुश्किल है और बीच के शहरों में इतनी बरसातें कि जाते जाते लगभग सारे रंग धुल जाते हैं बदन...