विरह पंक्ति

लोग आते हैं,
चले जाते हैं....
मैं,
कि जैसे बिखरा ख्वाब किसी की आंखो का ।
टूट चुका हूं,
टूटा पड़ा हूं,
इधर ही कहीं.....
किसी कोने में ।।
#उत्तम_त्रिपाठी

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