एक दिन,तुम

एक दिन छत पर फड़फडाती गौरैया,

सागर ढूँढ लेगी..

मजदूर अपने हक़ की खाने लगेगा 

सरकार मजलूमों के लिए काम करने लगेगी,

किसानो की फसलें लहलहा उठेंगी..

दुनिया बदल जाएगी 

और तुम लौट आओगी ,

मेरे इंतजार को ख़तम करने....!!

 


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