Aaj Dekha
एक चाँद को आसमां में ज़ाते देखा... संग चकोर को उसकी य़ादो में रोते देखा, बड़ी अजीब ख्वाहिश लिये जो संवरती थी उसकी आँखो में.. आज उसी को उसकी रूह से बिछुडते देखा ! गिर गिर के उठी बड़ी हवावों में वो .. मगर जजबातो को आँधियों में बदलते देखा, मासूम सुबह थी गरजते बादलों की वो.. आज सूरज को भी पश्चिम से निकलते देखा !! माहे सितम्बर की दिलनशी सुबह में.. तारो को भी गगन में टिमटिमाते देखा, हद्द तो ये भी बहुत हुई आज.. जब सूखे फूलो पर भौरो को मंडराते देखा !!! #उत्तम त्रिपाठी