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Showing posts from September, 2017

Aaj Dekha

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एक चाँद को आसमां में ज़ाते देखा... संग चकोर को उसकी य़ादो में रोते देखा, बड़ी अजीब ख्वाहिश लिये जो संवरती थी उसकी आँखो में.. आज उसी को उसकी रूह से बिछुडते देखा ! गिर गिर के उठी बड़ी हवावों में वो .. मगर जजबातो को आँधियों में बदलते देखा, मासूम सुबह थी गरजते बादलों की वो.. आज सूरज को भी पश्चिम से निकलते देखा !! माहे सितम्बर की दिलनशी सुबह में.. तारो को भी गगन में टिमटिमाते देखा, हद्द तो ये भी बहुत हुई आज.. जब सूखे फूलो पर भौरो को मंडराते देखा !!! #उत्तम त्रिपाठी

Ek Talaash

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तेरी खुशियों में, छिपी तेरी उदासियां तलाश करता हूँ .. गुजरे लम्हों में खुश हुए ज़िनमे हम, उन पलो की मैँ घड़ीयां तलाश करता हूँ... तू बगिया है मेरी ख्वाबो की, तुझमे मैं कलियां तलाश करता हूँ... प्यास लगी है इस कदर की चुल्लू भर पानी मिले, तू सागर है मेरे प्रेम की... तुझमे मैं बस नदियाँ तलाश करता हूँ ... खुले बादलो में पूरी चांदनी की तरह.. तू करवाचौथ है मेरी तुझमे प्रेम की मैं सदियाँ तलाश करता हूँ ... ज़माना तुझमे खामियां ढूँढ़ता फिरता है, मैं उन खामियों में तेरी खूबियां तलाश करता हूँ !! #उत्तम त्रिपाठी

Banke Mila

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बहुत खुश हुआ मैं,बनके जब वो मरहम मिला.. एक उसके सिवा न दुनियाँ में,कोई हमदम मिला ! बनाके रूखे दिल को,इक हरा चमन.. दोबारा पत्तों पर न सूखा, कभी शबनम मिला ॥ #उत्तम त्रिपाठी

Bheegi Yad

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प्यार तुमसे ही करता रहा, फिर भी दर बदर भटकता रहा. . जो बात कहनी थी तुमसे, वो खुद से ही कहता रहा ! तुम्हारी खातिर ही बेचैन रहा हर वक्त मैं, तुम्ही को देखकर जाने फिर क्यों मैँ छिपता रहा ! मिले भी हम ज़िन्दगी की हकीकत में कुछ ऐसे , रह रहकर ख्वाबो में भी ख्वाब बनकर मिलता रहा ! अंधेरे दीपक के पतंगो की भांति बन #उत्तम नजदीक पहुँचकर भी मैं लौ से ही जलता  रहा !! #उत्तम त्रिपाठी