Ek Talaash

तेरी खुशियों में,
छिपी तेरी उदासियां तलाश करता हूँ ..

गुजरे लम्हों में खुश हुए ज़िनमे हम,
उन पलो की मैँ घड़ीयां तलाश करता हूँ...

तू बगिया है मेरी ख्वाबो की,
तुझमे मैं कलियां तलाश करता हूँ...

प्यास लगी है इस कदर की चुल्लू भर पानी मिले,
तू सागर है मेरे प्रेम की...
तुझमे मैं बस नदियाँ तलाश करता हूँ ...

खुले बादलो में पूरी चांदनी की तरह..
तू करवाचौथ है मेरी
तुझमे प्रेम की मैं सदियाँ तलाश करता हूँ ...

ज़माना तुझमे खामियां ढूँढ़ता फिरता है,
मैं उन खामियों में तेरी खूबियां तलाश करता हूँ !!
#उत्तम त्रिपाठी

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