सच में

तुम्हारा मुस्कुराना,
कि जैसे कलियों पर निखार आना ...

तुम्हारा रूठना,
कि जैसे..
किसी ने कायनात पलट दी हो "वैसे" ।।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

शहर दिल्ली और वो

बेरहम ज़माना

एक दिन,तुम