Ab to ban jao Gazal

नजर मे खुद की न गिरो कि अब सुधर जाओ।
बहुत बिगाड़ा है तुमने अब तो बन जाओ।
धोखा बार बार खुद को ही आखिर देते क्यूँ हो?
किसी उद्देश्य खातिर जिन्दगी मे रम जाओ।
राह, राह है, जन्नत ओ जहन्नुम की ओर ले जाती।
बस इक नेक राह अब तुम भी जरा चुन जाओ।
खत्म करो उहापोह, आपाधापियों के सिलसिले।
बनो अडिग और वक्त का उपयोग जरा कर जाओ।
रात की बात है दिन भी मिलेगा यहाँ तुमको 'Uttam'।
उजाला तुमसे हो बस सूरज की तरह चमक जाओ।
#उत्तम त्रिपाठी

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