Ek Nanhi Pari Gazal

मेरी एक गज़ल --
-मैं परेशां हूँ --
(प्यारी बिटिया को समर्पित)
क्या कहूँ बेटी ! मैं बहुत परेशां हूँ ,
मिल ना सका तुझे इन्साफ ,मैं पशेमां हूँ .
तेरे गम से मेरा गम ऐ लाडो ! जुदा नहीं,
तेरे अश्को -आहों में लहू की मानिद रवां हूँ .
तेरी दर्द भरी चीखें अब भी मैं सुनता हूँ ,
जाने ज़माना क्यों हो रहा बेहरा ,हैराँ हूँ .
इन सियासत दारों को तो अपनी पड़ी है ,
इन्हें तो शर्म नहीं , मगर मैं शर्मिन्दा हूँ .
क्या कहूँ बेटी ,मैं बहुत परेशां हूँ ;
मिल न सका तुझे इंसाफ,मैं पशेमा हूँ !!
#उत्तम त्रिपाठी #

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