Bewafa Sanam

जिक्र खुशियों का किया, और ग़म मे डुबा गया।
वो बेवफा सनम यारों, मुझको ही मुझसे छुपा गया।
आँखों मे मेरी अपने जादुयी चेहरे का जादू करके,
वो मेरा मालिक बन, मेरे वजूद को जाने कहाँ लुटा गया?
अपनी यादों के सब्जबाग को मेरे दिल मे सजा कर,
मुझे अपनी जिन्दगी से ही वो हरजायी भुला गया।
सितम ये भी न कम था कि आज फिर से वो मिला,
मुस्कुराते हुए मुझे, अपनी खुशियों से जिन्दा जला गया।
#उत्तम त्रिपाठी

Comments

Popular posts from this blog

शहर दिल्ली और वो

बेरहम ज़माना

एक दिन,तुम