बेरहम ज़माना
जामाना अब बेरहम सा लगता है,
मुस्कुराना उनका का अब बहुत खलता है,
शख्त मुस्किल में हूँ ये खुदा की क्या करू मैं अब
पीछे पीठ के भोकना छूरा अब यहां चलन सा लगता है !!
चुनुं कंकर..या नगीना बांध लूँ ,
छोडू साहिल या सफीना मांग लूं,
ज़माने! तू मुझसे जलता बहुत है
तू कहे तो छोड जीना मैं मृत्यु मांग लूँ !!
#उत्तम त्रिपाठी
मुस्कुराना उनका का अब बहुत खलता है,
शख्त मुस्किल में हूँ ये खुदा की क्या करू मैं अब
पीछे पीठ के भोकना छूरा अब यहां चलन सा लगता है !!
चुनुं कंकर..या नगीना बांध लूँ ,
छोडू साहिल या सफीना मांग लूं,
ज़माने! तू मुझसे जलता बहुत है
तू कहे तो छोड जीना मैं मृत्यु मांग लूँ !!
#उत्तम त्रिपाठी

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ReplyDeleteBahut Khub yrr
ReplyDeletethanx ...#yara
ReplyDeletethanx ...#yara
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