याद आयी है ॥

दिसम्बर की आज शाम मे बारिश आयी है ..
आज़ फ़िर तुम्हारी याद आयी है ॥

बड़ी बेचैन करती हैँ तुम्हारी ये खामोशियाँ ..
इस बेचैनी को ये मिटाने आयी है..
आज़ फ़िर तुम्हारी याद आयी है ॥

जितनी भी बारिश हो सूरज आ ही जाता है..
कोई कितना भूले याद आ ही जाता है..
इसी उलझन को सुलझाने आयी है..
आज़ फ़िर तुम्हारी याद आयी है ॥

धड़कनें तेज हो जाती हैँ ..
जब तुम सोचती हो मेरे बारे में..
उसी धड़कनों को शायद ये मनाने आयी है..
लो आज़ फ़िर तुम्हारी याद आयी है ॥
#उत्तम त्रिपाठी

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