एक चाह

कल की मुलाकात का वो चेहरा लौटा दो..
उनके तन से मेरी गजलों का बिस्तर महका दो !

नींद भी है,बिस्तर भी है और आँखे भी हैं..
कल मैं उनके घर आज उनको मेरे घर सुला दो !!
#उत्तम त्रिपाठी

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