सच्चा प्यार

न करार  है, न  बेबसी, न  जाने  कैसा  शुरूर है।
ये वक्त जैसा वक्त नही, हाँ बदला बदला जरूर है।

वो निगाहें  जिनकी तलाश मे हम भटकते रहे बस गली गली।
वो निगाहें अपने घर मे ही, खुद की खुशियों से मजबूर  हैं।

वो, वो ही हैं , है प्यार जिसका, हाँ पहला भी और सच्चा भी।
वो बिछड़ रही तो प्यार भी, राह- ए -खुदगर्जी पे बहुत दूर है।
#उत्तम त्रिपाठी

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